अदानी एंटरप्राइजेज शेयर मूल्य हाइलाइट्स: अदानी एंटरप्राइजेज स्टॉक मूल्य इतिहास

अदानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) भारत के प्रमुख औद्योगिक समूहों में से एक है, जो विविध क्षेत्रों जैसे खनन, ऊर्जा, बंदरगाह, हवाई अड्डे, सड़कें, रेलवे, जल आपूर्ति, डेटा सेंटर, सौर विनिर्माण, कृषि और रक्षा में सक्रिय है। यह कंपनी अदानी समूह की फ्लैगशिप इकाई है और देश की आर्थिक वृद्धि के लिए नई व्यवसायों को जन्म देने वाली एक प्रमुख इनक्यूबेटर के रूप में जानी जाती है। अदानी एंटरप्राइजेज के शेयर मूल्य का इतिहास न केवल कंपनी की वृद्धि की कहानी बयां करता है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव, वैश्विक घटनाओं और नियामकीय चुनौतियों का भी प्रतिबिंब है। इस लेख में हम अदानी एंटरप्राइजेज के स्टॉक मूल्य इतिहास की प्रमुख हाइलाइट्स पर चर्चा करेंगे, जिसमें प्रारंभिक वर्षों से लेकर सितंबर 2025 तक के प्रमुख माइलस्टोन, उच्च-निम्न बिंदु, प्रभावित करने वाली घटनाएं और हालिया प्रदर्शन शामिल हैं। यह इतिहास निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है कि कैसे साहसिक विस्तार और चुनौतियां एक कंपनी को वैश्विक स्तर पर मजबूत बना सकती हैं।

अदानी एंटरप्राइजेज की स्थापना 1993 में हुई थी, लेकिन इसका स्टॉक 1995 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर लिस्टेड हुआ। शुरुआती वर्षों में कंपनी मुख्य रूप से व्यापार और निर्यात पर केंद्रित थी, विशेषकर कृषि उत्पादों और वस्तुओं पर। 1990 के दशक के अंत में, जब शेयर मूल्य लगभग 10-20 रुपये के बीच घूम रहा था, कंपनी ने धीरे-धीरे विविधीकरण की शुरुआत की। 1990 के दशक में वैश्विक व्यापार उदारीकरण के कारण, अदानी समूह ने बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में प्रवेश किया। 1998 में मुंद्रा बंदरगाह का अधिग्रहण एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसने स्टॉक को गति दी। उस समय शेयर मूल्य में 50% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक कंपनी की बुनियादी ढांचा क्षमता पर भरोसा करने लगे। 2000 के दशक की शुरुआत में, आईटी बूम और आर्थिक सुधारों के बीच, अदानी एंटरप्राइजेज ने ऊर्जा क्षेत्र में कदम रखा। 2002 में कंपनी ने थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स की घोषणा की, जिसके बाद शेयर मूल्य 2005 तक 100 रुपये के पार पहुंच गया। यह अवधि कंपनी के लिए स्थिर वृद्धि की थी, जहां वार्षिक उच्च बिंदु 150 रुपये और निम्न 80 रुपये के आसपास रहा। हालांकि, 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट ने स्टॉक को प्रभावित किया, और मूल्य 50 रुपये तक गिर गया, लेकिन अदानी समूह की मजबूत बैलेंस शीट ने जल्दी रिकवरी सुनिश्चित की।

2010 का दशक अदानी एंटरप्राइजेज के लिए परिवर्तनकारी साबित हुआ। इस दौरान कंपनी ने नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी पर जोर दिया, जो भारत सरकार की स्वच्छ ऊर्जा नीतियों से मेल खाता था। 2012 में अदानी ग्रीन एनर्जी की स्थापना और उसके बाद 2015 में अदानी पावर के विस्तार ने स्टॉक को बूस्ट दिया। 2010 में शेयर मूल्य लगभग 500 रुपये था, जो 2017 तक 200 रुपये के निम्न स्तर पर पहुंच गया, मुख्य रूप से कोयला खनन परिवर्तनों और पर्यावरणीय मुद्दों के कारण। लेकिन 2018-2019 में, जब कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया के कारमाइकल कोयला खदान का अधिग्रहण किया (लगभग 1 बिलियन डॉलर में), स्टॉक में तेज उछाल आया। मूल्य 300 रुपये से 800 रुपये के बीच पहुंच गया। इस अवधि की प्रमुख हाइलाइट थी 2019 में कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1 लाख करोड़ रुपये पार करना, जो निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। कोविड-19 महामारी ने 2020 में स्टॉक को बुरी तरह प्रभावित किया; मार्च 2020 में लॉकडाउन के दौरान शेयर मूल्य 100 रुपये के आसपास गिर गया, जो कंपनी के लिए सबसे निम्न बिंदु था। हालांकि, भारत की आर्थिक रिकवरी और इंफ्रास्ट्रक्चर पुश ने 2021 तक मूल्य को 1,500 रुपये तक पहुंचा दिया।

2022-2023 अदानी एंटरप्राइजेज के इतिहास का सबसे विवादास्पद अध्याय रहा। जनवरी 2023 में अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंदनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट ने समूह पर स्टॉक मैनिपुलेशन, इंसाइडर ट्रेडिंग और संबंधित पक्ष लेनदेन के आरोप लगाए। रिपोर्ट में दावा किया गया कि अदानी एंटरप्राइजेज और अदानी पावर में फंड्स को तीन शेल कंपनियों—अदानी कॉर्पोरेट एंटरप्राइजेज, माइलस्टोन ट्रेडलिंक्स और रेहवार इंफ्रास्ट्रक्चर—के माध्यम से रूट किया गया। इसके परिणामस्वरूप, अदानी समूह के शेयरों में 100 बिलियन डॉलर का मार्केट वैल्यू वाइपआउट हुआ। अदानी एंटरप्राइजेज का शेयर मूल्य फरवरी 2023 में 2,500 रुपये से गिरकर 1,000 रुपये के नीचे आ गया। यह घटना भारतीय शेयर बाजार के लिए एक झटका थी, लेकिन अदानी समूह ने मजबूती से जवाब दिया। सेबी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने जांच शुरू की, और कंपनी ने स्पष्ट किया कि सभी लेनदेन पारदर्शी थे। इस संकट ने स्टॉक की अस्थिरता बढ़ाई, लेकिन लंबे समय में यह कंपनी की लचीलापन को मजबूत करने वाली साबित हुई।

2023 के अंत तक रिकवरी शुरू हो गई। भारत सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं, जैसे गति शक्ति और नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन, ने अदानी को फायदा पहुंचाया। कंपनी ने हवाई अड्डों का प्रबंधन (जैसे मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट) और सड़क परियोजनाओं का विस्तार किया। 2024 में शेयर मूल्य 2,000 रुपये के पार स्थिर हो गया, और वार्षिक उच्च 3,000 रुपये के करीब पहुंचा। प्रमुख माइलस्टोन में अदानी रोड ट्रांसपोर्ट का डीपी जैन टीओटी टोल रोड्स का 1,342 करोड़ रुपये में अधिग्रहण (सितंबर 2024) शामिल था, जिसने लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाई। इसी वर्ष, कंपनी ने सौर विनिर्माण में निवेश बढ़ाया, जो ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन का हिस्सा था। मार्च 2024 तिमाही में राजस्व 94,384 करोड़ रुपये और लाभ 7,209 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष से 20% अधिक था। हालांकि, ब्याज कवरेज रेशियो कम होने के कारण चिंताएं बनी रहीं।

2025 में अदानी एंटरप्राइजेज का स्टॉक मूल्य एक मिश्रित प्रदर्शन दिखा। वर्ष की शुरुआत में, समूह ने पावर सेक्टर में 60 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की, जिसमें 17 बिलियन डॉलर अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए। इससे स्टॉक में उत्साह आया, लेकिन हिंदनबर्ग मामले की लंबित जांच ने दबाव बनाए रखा। जून 2025 तिमाही में प्रोमोटर होल्डिंग 73.97% स्थिर रही, लेकिन राजस्व 13.93% गिरकर 22,436 करोड़ रुपये हो गया। शेयर मूल्य 2,025 रुपये के 52-सप्ताह निम्न से शुरू होकर सितंबर तक उतार-चढ़ाव भरा रहा। अगस्त-सितंबर में 30 दिनों में 26.94% की गिरावट आई, लेकिन सितंबर 18, 2025 को सेबी के अंतिम आदेश ने सब बदल दिया। सेबी ने गौतम अदानी और समूह को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया, पुष्टि करते हुए कि कोई इंसाइडर ट्रेडिंग या फंड रूटिंग नहीं हुई। इसके तुरंत बाद, अदानी एंटरप्राइजेज का शेयर 5.08% उछलकर 2,402 रुपये पर बंद हुआ, जबकि अदानी पावर 9% और अदानी ग्रीन 10% चढ़ा। सितंबर 22, 2025 तक मूल्य 2,636 रुपये पर पहुंच गया, जो 4.44% की वृद्धि दर्शाता है। मार्केट कैप 2,91,315 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष से 16.1% नीचे है, लेकिन हालिया रैली से संकेत मिलता है कि रिकवरी मजबूत हो रही है।

अदानी एंटरप्राइजेज के स्टॉक इतिहास की प्रमुख हाइलाइट्स निम्नलिखित हैं:

  1. प्रारंभिक वृद्धि (1995-2010): लिस्टिंग मूल्य 10 रुपये से शुरू होकर 500 रुपये तक पहुंचा, बंदरगाह और व्यापार पर आधारित।
  2. विविधीकरण चरण (2010-2020): ऊर्जा और इंफ्रा में प्रवेश से उच्च 800 रुपये, निम्न 100 रुपये (कोविड प्रभाव)।
  3. हिंदनबर्ग संकट (2023): 2,500 से 1,000 रुपये की गिरावट, लेकिन रिकवरी 2024 में।
  4. हालिया रिकवरी (2025): सेबी क्लीन चिट से 2,025 के निम्न से 2,636 के उच्च पर, पी/ई रेशियो 43.46।

कंपनी की वित्तीय मजबूती देखें तो मार्च 2025 में आरओई 14.88% रहा, जो 5-वर्षीय औसत से बेहतर है। डिविडेंड 1.30 रुपये प्रति शेयर (0.11% यील्ड) घोषित किया गया। एमएफ होल्डिंग 2.67% और एफआईआई 11.55% है, जो संस्थागत विश्वास दर्शाता है। भविष्य में, कंपनी का 30,000 किमी ट्रांसमिशन लाइन विस्तार और डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स स्टॉक को बूस्ट दे सकते हैं। हालांकि, कम ब्याज कवरेज और वैश्विक ऊर्जा संक्रमण जोखिम बने रहेंगे।

अदानी एंटरप्राइजेज का स्टॉक इतिहास साहस, नवाचार और लचीलापन की कहानी है। 1995 के साधारण शुरुआत से 2025 की वर्तमान स्थिति तक, यह कंपनी भारतीय बाजार की गतिशीलता का प्रतीक बनी रही। निवेशक जो लंबी अवधि के लिए सोचते हैं, उनके लिए यह स्टॉक विकास की अपार संभावनाएं रखता है, लेकिन अस्थिरता को ध्यान में रखना जरूरी है। सितंबर 23, 2025 तक, शेयर मूल्य 2,600 रुपये के आसपास स्थिर है, और सेबी के फैसले से नया अध्याय शुरू हो चुका है। (शब्द संख्या: 1,028)

Leave a Comment